Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 101, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 101, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 101 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
जगद्रूपैककचनमविनाशि चिदम्बरम् ।
उदयास्तमयोन्मुक्तं स्थितमात्मनि केवलम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह संविद् के नाश का संभव न होने से जगद्रूप स्फुरणवाला
उदय ओर अस्त से रहित अविनाशी चिदाकाश अपनी आत्मा में ही स्थित हे