Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 101, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 101, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 101 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
मृतिरत्यन्तनाशश्चेत्तद्भवामयसंक्षयः ।
भूयः शरीरलाभश्चेन्नव एव तदुत्सवः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
मृत्यु के बाद कुकर्मियों को नरक आदि के श्रवण से यदि भय होता है, तो फिर जीवित प्राणियों
को भी, जो चोरी आदि कुत्सित कर्म करनेवाले हैं, राजदण्ड का भय बना रहता है तथा “अत्युत्कट
पाप कर्मों का फल प्राणी को इसी लोक में जीते जी भोगना पड़ता है,” यों पाप कर्मों के फलश्रवण
से यहाँ भी उन्हे भय होता ही है