Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 102, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 102 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
आत्मीयेष्वर्थजातेषु मिथ्यात्मसु सुतादिषु ।
बुद्बुदेष्विव तोयानां न स्नेहस्तत्त्वदर्शिनाम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, तत्त्वदर्शी
महात्माओं को मिथ्याभूत पुत्र आदि अलीक पदार्थसमूहों से ऐसे ही स्नेह नहीं होता, जैसे कि जल
के बुद्बुदों में