Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 11
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हिन्दी अर्थ
इस प्रकार सृष्टि के आरम्भ में सत्यसंकल्प होने के कारण जिसके मार्ग में कोई बिघ्नबाधा
(रूकावट) उत्पन्न नहीं होती ऐसी संवित् अपने संकल्पानुसार जैसी ही होती है वैसी ही इस समय
सब लोगों की अनुभूति है । संवित् का स्वभाव ही इसमें कारण है