Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 33
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हिन्दी अर्थ
यदि कोर्ड प्रश्न करे कि उसके बाद क्या होगा 2 तो इस पर कहते हैं /
दिन पर दिन समीप में आ रही मृत्यु के प्राप्त होने पर ऐसा दुःख प्राप्त होगा कि जिसमें
अंग-अंग का छेदन भी शीतलचन्दन लेपके समान अवश्य भोगना पड़ेगा