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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 34

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 34

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

मूर्ख लोग युद्ध आदि में प्राणों की बाजी लगाकर भी धन और विजयाभिमान का उपार्जन करते हैं, किन्तु वे विवेक, वैराग्य, श्रवण आदि उपायों से प्राप्त हुई तत्त्व बुद्धि से अजर-अमर मोक्षपद का उपार्जन क्यों नहीं करते ?