Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 36
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हिन्दी अर्थ
हे पुरुषों, आप लोग अभिमान तथा मोह से रहित विवेक को प्राप्त होकर यानी
तत्त्व जानकर मोक्षगति को प्राप्त हों अधम संसारगति को प्राप्त न हों । आत्मबोध द्वारा बड़ी-
बड़ी विपदाओं की जड़ खोदी जाती हे