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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 58

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 58 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 58

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

कारण का अभाव कैसे हैं ? ऐसा प्रशन होने पर कहते हैं । सभी इन्द्रियों से अज्ञेय स्वप्रकाश चिदेकरस परब्रह्म में मन सहित पाँच ज्ञानेन्द्रियों से वेद्य होनेवाले पदार्थो के कारण की प्रलयकाल में संभावना तक नहीं की जा सकती है