Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 85
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 85 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 85
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हिन्दी अर्थ
स्वयम्भू नाम का अपना शरीर
महाचिति का पहला स्वप्न है । तदनन्तर स्वयम्भू शरीर से उत्पन्न हुए हम लोग दुसरे स्वप्न
के सदृश हैं