Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 88

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 88 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 88

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

ब्रह्म से लेकर तृणपर्यन्त सारा जगत्‌ स्वप्नजगत्‌ के समान अलीक (असत्य) ही उत्पन्न होता है और स्वप्न जगत्‌ के समान ही नष्ट हो जाता है