Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
सति वाऽसति वा देहे निर्दुःखसुखत्वमक्षयं मोक्षः ।
बुद्धेऽमले स्वभावे निर्भरविश्रान्तिरस्तु सर्वेह ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
बन्धुमरण ज्ञान विशिष्ट जीव है तथा पिशाचदर्शन उसका
धर्म है, यदि ऐसा नियम हो, तो भी बन्धु के जीवित रहते ही मिथ्या देशान्तर में उसकी कल्पित
मृत्यु सुनने पर पिशाचता को मनुष्य क्यों नहीं देखता ?