Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 106, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 106, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 106 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
तत्तदेव परं शान्तं चिद्व्योमैव तथा स्थितम् ।
स्वरूपादच्युतं स्वस्थं सौम्यं जगदिवोदितम् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
जाग्रत ओर स्वप्न दोनों ही उपन्यासमय (ग्रंथ के कथा के अर्थ के समान काल्पनिक)
ही हैं यथार्थ नहीं है, इसलिए दोनों परस्पर एक दूसरे के उपमान-उपमेय बने हुए हैं