Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 106, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 106, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 106 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
एवं चेत्तद्वद ब्रह्मन्द्रष्टृदृश्यावभासनम् ।
किमिदं कथमाभाति भूयोऽपि वदतांवर ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
स्थावर ओर जंगम समस्त प्राणी विचार करने पर चिन्मात्र के
सिवा और क्या ठहरते हैं, कुछ भी नहीं ठहरते