Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 106, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 106, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 106 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
असद्रूपस्य दृश्यस्य कारणाभावतः सदा ।
दृश्यतास्येत्यपि प्रौढिनिर्देशस्यात्यसंभवात् ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
है, उससे अतिरिक्त नहीं है