Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 106, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 106, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 106 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

विनिवृत्ताखिलेच्छस्य पुंसः संशान्तचेतसः । यादृशः स्यात्समो भावस्तादृशं चिन्नभः स्मृतम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

अपने आप होनेवाले चिदाकाश ने अन्धकार से आवृत आत्मरूप आकाश में पर्वत, नगर आदि का स्वरूप धारण करनेवाले अपने चमत्काररूप तम को जाग्रत स्वप्न मेँ जगत्‌ सम्या है