Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 106, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 106, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 106 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
तृणगुल्मलतादीनां वृद्धिमागच्छतामृतौ ।
यः स्यादुन्ममतो भावः स चिदाकाश उच्यते ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे स्वप्नावस्था में भासित हुआ त्रैलोक्य वास्तव में कुछ नहीं है, शून्य है वैसे
ही जाग्रत् अवस्था में भी भासित हो रहा यह त्रैलोक्य स्वरूपहीन (निराकार) शून्य ही है