Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 106, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 106, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 106 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
रूपालोकमनस्कारविमुक्तस्यामृतस्य यः ।
भावः पुंसः शरद्वद्योमविशदस्तच्चिदम्बरम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
महात्मन्, विविध प्रकार के गृह, उपवन आदि की निर्मितियों से शोभायमान स्वप्न मेँ आरम्भ
अनारम्भ ही है ओर असत् सत् के समान व्याप्त है