Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 107, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 36
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हिन्दी अर्थ
यह परमात्मा का ही रुप है, यह केसे जाना 2 इस आशंकापर स्वप्नद्ृष्टान्त से जाना,
यह कहते हैं /
जैसे स्वप्न में चिन्मात्र ब्रह्म ही आकाश-उपवन बनता है वैसे ही चिन्मात्र अपने में अपने आप
जगद्रूप से भासित होता है