Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 107, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
किमास्था बालका ब्रूत ममेदमहमित्यलम् ।
आ ज्ञातं रमते बालसंकल्पे बाल एव च ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
वर्षाऋतु या शरव्त्ऋतु में वृद्धि को प्राप्त हो रहे
पेड, पौधे ओर झाड़ियों का जो ममताहीन आनन्दभाव हे, वह चिदाकाश कहा जाता हे