Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 39
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हिन्दी अर्थ
घोड़ों के झुण्ड, जो गति के क्रम से पृथिवी की समता, विषमता की नाई समता विषमता
कर रहे हैँ, वायु से आन्दोलित महासागर की भाँति हिनहिना रहे हैं