Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 40
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हिन्दी अर्थ
क्षीरसागर के जल के
समान फेनयुक्त आवर्तो की (जलभ्रमियों की) भाँति इधर-उधर वृत्ताकार घूम रहे घोड़ों के वृन्द
शब्द करते हैं