Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 41
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हिन्दी अर्थ
जैसे प्रलयकाल के सागर का प्रवाह बड़े-बड़े ज्वार भाटों से प्रत्येक दिशा में
प्रकट होता है वैसे ही आकाश के समान स्वच्छ कान्तिवाले कवच श्त्रास्त्रों से युक्त सेना भी
प्रत्येक दिशा मेँ प्रकट होती है