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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 110, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 110, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 110 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

हेतिसंघट्टनिष्क्रान्तज्वालाप्रज्वलिताम्बरम् । वलीपलितनिर्मुक्तशूराक्रान्तत्रिविष्टपम् ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

दिगन्तं मे प्रसिद्ध सिद्ध सेनाओं से पूर्ण अपूर्व सुवर्णं भूमियों में मेने खूब विहार किया, लोकालोक पर्वतपर्यन्त पर्वतो के और सीमाप्रान्तवर्ती राजाओं के सिरपर मेघो की लीला से विश्राम किया और पैर रक्खा