Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 110, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 110, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 110 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
पाण्डुपांसुपयोवाहकचच्चक्राचिरद्युति ।
हेतिनिर्विवराकाशयुधानाधारभूतलम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे ज्ञानपूर्णं एकान्त में समाधि लेनेवाली बुद्धि से
परमोच्च ब्रह्म में विश्राम लिया जाता है वैसे ही प्रजाओं का हितसम्पादन करनेवाले मैंने राष्ट्रों
की अभिवृद्धि की ओर उपार्जन किया