Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 110, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 110, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 110 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
शौर्यादीनां प्रसुप्तानां स्वगुणानां प्रबोधनम् ।
धनमाधारभूतानां राष्ट्रेषु भुजशालिनाम् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे विभो, उन शरीरों से मैं चारों दिशाओं में अपने शत्रुओं का बिना किसी
बिघ्नबाधा के संहार करूँ और आपके दर्शनों की इच्छा से आपका स्मरण करनेवाले मुझे आप
दर्शन दें