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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 110, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 110, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 110 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

दन्त्यारूढरथास्फोटप्रभग्नकटवारणम् । समस्तमत्तगन्धेभदानवारिनिवारणम् ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामचन्द्रजी, यह कहकर उस राजा ने जैसे बालक अनायास चंचल कमल को तोड़ता है वैसे ही चंचल शिररूप कमल को खड्ग लेकर शीघ्र काट डाला