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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 110, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 110, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 110 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

सारसारवसामन्तमुक्तमत्तमतङ्गजम् । जरज्जितकरानीककल्पितासीकवेदनम् ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

ज्योंही वह राजा अपने कटे सिर का अग्नि में हवन करने लगा त्योंही शरीर के साथ अग्नि में गिर पड़ा