Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 111, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 111, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 111 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
कचदायुधखण्डौघडीनरत्नावृतोदरम् ।
चलद्व्यूहचलट्यस्तयन्त्राश्मक्षेपणाश्मकम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
और उड़ रहे थे, बाणरूपी जलतरंगों से पीडित हुए योद्धाओं के
आयुरूपी जलचर टूक-टूक हो रहे थे