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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

चक्रावर्तशतोन्मुक्तो युक्तः सौम्यतयाच्छया । प्रशान्तमेघसंरम्भतरङ्गोत्तुङ्गवर्षणः ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

श्रवण नक्षत्र के संस्थान के (शरीर गठन के) समान तीन शिखराग्रों से युक्त महेन्द्र पर्वत स्वर्ग में जा रहे योद्धा से परिवृत होकर मेघो से परिवृत-सा हो गया