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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

धारापङ्कतलालीनशान्तहेतिजलेचरः । नाराचसीकरासारनीहारपरिवर्जितः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

शक लोग रक्तमय बाणराशि को क्षण भर भी सहन न कर सके एवं रमठों के प्राण कमलिनी समूह की भाँति मारे भय के कोप उठे