Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
अन्तर्लीनर्क्षरत्नौघकोणसंस्थार्कवाडवः ।
शून्यतावारिरमलो व्योमैकाब्धिरभूत्पृथुः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
तंगणयोद्धाओं
की सेना, जिसका आकार सुन्दर सुवर्णं के सदृश था, चोरों द्वारा वस्त्रादिलुण्ठनपूर्वक छिन्न-
भिन्न की गई, फिर निशाचरों द्वारा एकान्त में चट कर दी गई थी, यों मटियामेट हो गई