Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
मकरव्यूहनिर्ह्रादघर्घरोदरघुंघुमान् ।
मत्स्यपुच्छच्छटाच्छिन्नमज्जत्पोतकृतारवान् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
मृगों ओर पक्षियों के विहार के
लिये सुन्दर रंगभूमिरूप पर्वत और वनभूमिया में विपश्चित् के आगमनं से या शस्त्रास्त्रों के संपातों
से चारों ओर अत्यन्त घबड़ाहट फैल गई