Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
उद्ग्रीवकूर्ममकरनिगीर्णौर्णनरोत्करान् ।
ऊर्मिबिम्बितसप्ताश्वसहस्रार्कनभोनिभान् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
करंजवन के समान कठोर कण्टक-स्थलनामक
योद्धा दस्युओं के देश मे करंज आदिके वनों में छिप गये