Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
भांकारकारिपवनपतद्भूत्यततोद्धटान् ।
ऊर्म्युदस्तमणिव्रातबलाज्झणझणध्वनीन् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
पारसी योद्धा समुद्र के तरंगवेग से
परलीपार पहुँच कर, वायु से पाक होकर प्रलयकाल तारों के समान गिर पड़े