Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
नानाजालैर्बलभुजैर्हेलास्पृष्टार्कमण्डलान् ।
नमदुन्नमदुद्रश्मिरत्नमाणिक्यमण्डलान् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
समुद्र को
तरगों के आन्दोलन द्वारा कूटनेवाले, पत्थरों की मार से पर्वतशिखरों पर चिह्न करनेवाले, सब
दिशाओं के वनों को झकझोरकर विनष्ट करनेवाले तथा प्रलय की आशंका पैदा करनेवाले प्रचण्ड
पवन बहने लगे