Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
उत्फालफेनिलावर्तविवर्तमकरोत्करान् ।
क्वचित्करिकरोन्नामैः क्षणं वंशवनीकृतान् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
क्षुब्ध हुए शब्त्रासत्रों ओर वायुओं द्वारा मूसलाधार वृष्टि से सम्पन्न होकर
कीचड़ ओर जल से सराबोर, गंभीर घुम्-घुम् शब्द युक्त तथा अदृश्य हो गई