Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
सर्वशक्तिमयैकेन चेतनेनेश्वरेण ते ।
प्रहिता दिग्जयं चक्रुः सर्व एव समाशयाः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
पारसदेश के
योद्धा अस्त्रप्रवाह से पत्तों की भाँति बहाये जाते हुए मोहवश आपस में प्रहार कर वंजुलावन में
विनष्ट हो गये