Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
एकदेशस्थितासंख्यनानासुरसुरालयान् ।
तारानवतरङ्गौघपरिदन्तुरिताम्बरान् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
वायु से उड़ाये जा रहे विदूरदेश के रथिक लहरों का-सा चीत्कार करते हुए कमलो से
भ्रमरो की तरह रथों से तालाब के जल में गिर गये