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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

दूराविश्रान्तयानेन तेषां तत्सर्वसाधनम् । आत्मीयं परकीयं च क्षीणं कुसरिदम्बुवत् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

कुल्हाड़ीरूपी चार शस्त्रास्त्रों की धारा के अग्रभाग से हुए पत्थर, कवच आदि के चूर्णरूपी बर्फ को धारण करनेवाले बिजलियों से आवेष्टित वारूणास्त्र से उत्पन्न हुए मेघ चले