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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

आत्मीयान्यन्यदीयानि तेषां वीक्ष्यबलान्यलम् । क्षीणानीव मुमुक्षूणां पुण्यपापानि धावताम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

आपस के आघातं से भग्नदन्त (जिनके दाँत टूट गये थे) देहों में रुधिर राशि से लथपथ पीड़क्रान्त हाथी मृत्यु के पेट की पूर्ति करनेवाले ग्रास के बराबार के पिण्ड ऐसे हुए