Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
स्वयमस्त्राणि शान्तानि कृतकृत्यान्यथाम्बरे ।
ज्वालाजालानि वह्नीनां दाह्यस्यासंभवादिव ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
भीषण तोमरों से पीटे गये
दरद देश के ही कोई योद्धा रात्रि में अपने रूप से पुरुषों को मोहित करनेवाली पिशाचियों द्वारा
उपभुक्त हुए और फिर उन्होने उनके अंग आपस में बाँट लिये, यों बेचारे रैवतक पर्वत में विलीन
हो गये