Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
आलयेषु रथाश्वेभवृक्षौघादिषु हेतयः ।
आसन्निद्रालवो लीना दिनान्ते विहगा इव ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
दशाण्दिश के योद्धा ताल और तमाल से घने पुराने जंगल में सिंहो द्वारा गले में पैर
डालकर हृदय चीरकर मार डाले गये