Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 115, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 115, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 115 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
इह हि पूर्वपयोधितटावटे विकटपत्रपटाः कटकीतटाः ।
नवमदासवयौवनसंश्रयाः कलय यान्ति कथं शबरस्त्रियः ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
गजेन्द्रो के गण्डस्थल से चू रहे
मदजल से मन्थर मूर्तिवाले ये विन्धयाचल के तोतों के साथ निकलने से उनके रंग से हरे से
प्रतीत होते हैं