Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
उन्नालनलिनीनालकदलीस्तम्भसंकुले ।
वने विहरतां लक्ष्मीं हंसानामेति कः खगः ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
खिले हुए फूलों से अत्यन्त शुभ्र
पुष्पवाटिकाओं से भरे हुए ये गाँव जिनमें मन्दार के वृक्षरूपी बहुत से फूलों के बर्तन हैं और नाना
प्रकार के मयूरो के नाचने के स्थानरूप ठण्डे प्रदेश है, प्रपातो की (बड़े-बड़े रनों की ) जलराशियों
के विलास ही जिनमें मयूरो के नाच के बाजे का काम करता हैं । एवं प्रतिध्वनियों से गूँज रही
गुहाओं से पूर्ण जंगलो में जिनकी जनता गाना गाती है, स्वर्ग से भी बढ़कर हैं