Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 55

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 55

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

यदि मूर्ख सर्वथा निन्दनीय ही है; तो नरेश आदि उनको अपने पास क्यों रखते हैं 2 इस संशय पर कहते हैं / यद्यपि मूर्खजन दोषों के भण्डार होते हैं फिर भी जैसे कोई कुनृपति कुत्तों को पालते हैं वैसे ही कुत्ते के सदृश कतिपय शूरता, सन्तोष, स्वामिभक्ति आदि गुणों के कारण ही कोई कुनरपति आदि मूर्खो को अपने पास रखते हैं