Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 57
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 57 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 57
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हिन्दी अर्थ
यद्यपि
सिह और कुत्ता दोनों में पशुता समान है यानी दोनों तिर्यग् योनि के जीव हैं, तथापि मेघगर्जन आदि
के कोलाहल को सिंह बिना क्षोभ के अनादरवश आँखें मूँदकर सहते हैं, किन्तु कुत्ते क्षुब्ध हो भयवश
आँखें मूँदकर सहते हैं यही दोनों की परस्पर विलक्षणता है