Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 60
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हिन्दी अर्थ
तुमसे बढ़कर
अधम कौन है ऐसा पूछनेवाले के प्रति हँसते हुए कहा : जो अज्ञान, अपवित्र देहादि में अभिमान,
विचारदृष्टिशून्यता का सेवन करता है, वह मुझसे बढ़कर अधम है । किन गुणों से तुम मूर्ख की अपेक्षा
श्रेष्ठ हो यह पूछने पर उसने कहा : शूरता, नैसर्गिक स्वामिभक्ति, अल्प मे ही सन्तोषये जो मेरे
गुण हैं, मूर्ख मे वे गुण लाखों प्रयत्नो से ढूँढ़ने पर भी नहीं पाये जा सकते