Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 66
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 66
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हिन्दी अर्थ
समान रंग के (एक से) पंखवाली कोयलों में हिलेमिले कौए को
कौन पहचानता यदि वह स्वयं काँव-काँव न कर बैठता