Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 67
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 67 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 67
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हिन्दी अर्थ
महाअरण्य की मिट्टी की बनी पुरानी
दीवार के ऊपर बैठा हुआ यह कौआ जैसे रात्रि के समय लोगों के सो जाने पर चोर श्मशान वृक्ष पर
चढ़कर दसों दिशाओं की ओर झाँकता है वैसे ही चारों ओर देखता है