Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 73
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 73 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 73
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हिन्दी अर्थ
रंग, शरीर को ढकनेवाले पंख और शरीर की गठन से कौओं के झुण्डों के
तुल्य कोयल, मूर्खो की सभा में पण्डित के सदृश वाणी द्वारा व्यक्त होता है